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Kavya hetu

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  काव्य-हेतु का अर्थ  काव्य : उन तत्वों को जो काव्य-रचना के मूल कारण होते हैं, काव्य हेतु कहा जाता है | इनको निमित्त कारण भी कहते हैं | निमित्त कारण उन कारणों को कहते हैं जो काव्य-रचना के निमित्त होते हैं अर्थात जिनके बिना काव्य रचना नहीं हो सकती |   काव्य-हेतु के संबंध में संस्कृत आचार्यों के मत  संस्कृत काव्यशास्त्र में सर्वप्रथम  आचार्य भामह  ने काव्य हेतुओं का स्पष्ट विवेचन किया |  भामह  ने काव्य के तीन हेतु स्वीकार किए हैं :- 1. प्रतिभा, 2. व्युत्पत्ति तथा अभ्यास | 1. प्रतिभा  – यह प्रकृति प्रदत्त योग्यता है | 2. व्युत्पत्ति –  इसके अंतर्गत शब्द शास्त्र और पद शास्त्र ज्ञान आते हैं | 3. अभ्यास –  बार-बार अभ्यास से काव्य-रचना में निखार आता है | आचार्य वामन  ने काव्य-हेतुओं में लोक, विद्या तथा प्रकीर्ण की चर्चा की है | उन्होंने प्रकीर्ण के छह भेद किए हैं – (1) लक्ष्य तत्व  अर्थात अन्य कवियों की रचनाओं का ज्ञान | (2)  अभियोग  अर्थात काव्य रचना का प्रयत्न अर्थात अभ्यास | (3)  वृद्ध-सेवा  अर्थात ज्ञान-वृ...

औरंगजेब की आखरी रात ( सारांश)

  औरंगजेब  ( Aurangzeb)  मुगल इतिहास का आखिरी हीरा है जो अपने जीवन भर अपने बुरे कर्मो से ही चमकता रहा और जब मरा तो सारी जिन्दगी का क्लेष और निराशा, विकलता और व्यथा को लेकर गया! जिन्दगी के पूरे सत्ताईस साल उसने दक्खन में बिताये और अंतिम सॉँस भी वहीं पर ली। दक्षिण सर करने की, शिवाजी और मरहठों को नेस्तनाबूद करने की, इस्लाम का झण्डा पूरे हिन्दोस्ताँ पर फहराने की वासना पूरी किये बिना ही वह चल बसा ।          प्रस्तुत एकांकी में उसकी इसी विकलता का चित्रण किया गया है। वह इतना कट्टर धार्मिक था कि उसने बीजापुर-गोलकुण्डा जैसी मुस्लिम रियासतों को भी जीत लिया, परन्तु वह मराठों को नामशेष करने में सफल न हुआ।           एक ओर राज्य में दुर्व्यवस्था फैल गई है, दूसरी ओर वह वृद्ध हो गया है। पहले जैसी ताकत अब उसके शरीर में नहीं रही । आलमगीर बनने का उसका विजय स्वप्न अब निराशा में तिरोहित हो चला है। उसकी चिंताएँ उसे एक पल के लिए भी चैन नहीं लेने देतीं और अंत में हताश होकर वह अहमदनगर लौट आया है।     ...

देवनागरी लिपि

  देवनागरी  एक भारतीय  लिपि  है जिसमें अनेक  भारतीय   भाषाएँ  तथा कई विदेशी भाषाएँ लिखी जाती हैं। यह बायें से दायें लिखी जाती है। इसकी पहचान एक क्षैतिज रेखा से है जिसे 'शिरोरेखा' कहते हैं।  संस्कृत ,  पालि ,  हिन्दी ,  मराठी ,  कोंकणी ,  सिन्धी ,  कश्मीरी ,  हरियाणवी ,  बुंदेली भाषा ,  डोगरी ,  खस ,  नेपाल भाषा  (तथा अन्य  नेपाली भाषाएँ ),  तमांग भाषा ,  गढ़वाली ,  बोडो ,  अंगिका ,  मगही ,  भोजपुरी ,  नागपुरी ,  मैथिली ,  संताली ,  राजस्थानी भाषा ,  बघेली  आदि भाषाएँ और स्थानीय बोलियाँ भी देवनागरी में लिखी जाती हैं। इसके अतिरिक्त कुछ स्थितियों में  गुजराती ,  पंजाबी ,  बिष्णुपुरिया मणिपुरी ,  रोमानी  और  उर्दू  भाषाएँ भी देवनागरी में लिखी जाती हैं। देवनागरी विश्व में सर्वाधिक प्रयुक्त लिपियों में से एक है। यह  दक्षिण एशिया  की 175 से अधिक भाषाओं को लिखने के लिए प्रयुक्त हो रही है।...